Hindi Poems
मेरा गांव...
बैठा हूं एक बंद कंबरे में,
यादों की किताबें लेकर ...।
सीचता हूवा उन पन्नोको,
ढूंढ रहा हूं वोह पल...।
याद आते हैं वोह दिन,
याद आती हैं वह गांव की गलियां...।
भूलना तो दूर की बात ,
सोच कर ही भीग जाती हैं अखियां...।
इन यादों से निकल कर ,
उन गलियों में फिर से कहीं घूम जाऊं...।
बारिश में भिगु,
और सपनों में खो जाऊं...।
कह रहा हैं ये दिल ,
वोह दिन भी जरूर आएगा...।
थोड़ा सब्र रख बंदे ,
वक्त तेरा भी आएगा...।
Jr.patil
Jr.patil


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